Library Bilaspur : पुस्तकालय जागरूकता की आवश्यकताएं एवं प्रचार-प्रसार के माध्यम: एक अध्ययन

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Library Bilaspur : पुस्तकालय जागरूकता की आवश्यकताएं, पुस्तकालय की आवश्यकता, भारत में पुस्तकालय की स्थिति, पुस्तकालय का उद्देश्य क्या है?

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Library Bilaspur प्रस्तावना

            Library Bilaspur – पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में ‘‘पुस्तकालय जागरूकता’’ शब्द एक नवीन अवधारणा है, जो आधुनिक समाज को पुस्तकालयों से जोड़ने पर बल देता है। पुस्तकालय से अपरिचित लोगों को पुस्तकालयों के प्रति जागरूक कर उन्हें पुस्तकालय से जोड़ने का कार्य भी करता है और पुस्तकालयों की समस्त प्रकार के सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय जागरूकता के लिए ग्रामीण पुस्तकालय की स्थापना करना अति आवश्यक है।

            पुस्तकालय आन्दोलन की औपचारिक शुरूआत 19 नवम्ब्र सन् 2011 को बिहार में बिहारियों ने जिलान्तर्गत अपने गांव खुलासा में ‘‘बागेश्वरी ग्रामीण पुस्तकालय एवं जागरूकता केन्द्र’’ की स्थापना कर दिया। पुस्तकालय आन्दोलन के माध्यम से बिहार के समस्त बदहाल पुस्तकालयों के पुनर्जागरण के लिए प्रयासरत है। इस पुस्तकालय एवं जागरूकता केन्द्र के संस्थापक दीनबंधु सिंह है। उनके इस प्रयास के लिए उन्हें वर्ल्ड मैनेजमेंट कांग्रेस द्वारा नेशनल इंफार्मेशन अवेयरनेस अवार्ड 2011 से नवाजा गया है।

            इसी प्रकार से दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के द्वारा भी पूरे दिल्ली शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों के प्रचार-प्रसार नेटवर्कों के माध्यम से पुस्तकालय जागरूकता पर विशेष रूप से ध्यान देकर यहां भी पुस्ताकालय एवं जागरूकता केन्द्र की स्थापना कर समय-समय पर समाज के लोगों को पुस्तकालय के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है जो एक प्रशंसनीय कार्य है। इसी प्रकार से हमें भी अपने राज्य छत्तीसगढ़ में राज्य, जिला, तहसील, बलाक, पंचायत और गांॅव आदि। सभी स्तरों पर पुस्तकालय जागरूकता की शुरूआत कर समाज के सभी व्यक्ति जैसे युवा, वृद्ध, बच्चे आदि को पुस्तकालय के प्रति जागरूक करना अति आवश्यक है।

पुस्तकालय जागरूकता का अर्थ:-

            यह दो शब्दों से मिलकर बना है, पुस्तकालय  जागरूकता अर्थात् पुस्ताकालय का अर्थ होता है कि जहां विविध प्रकार के ज्ञान, सूचना, स्त्रोतों और सेवाओं का संग्रह होता है, वहीं जागरूकता से अभिप्राय जो व्यक्ति इससे परिचित नहीं हो, उन्हें जागरूक करना है।

परिभाषा:-

            पुस्तकालय जागरूकता शब्द को परिभाष्ज्ञित इस प्रकार कर सकते हैं:-

Library Bilaspur धनकुमार महिलांग के अनुसार:-

1.         ‘‘पुस्तकालय जागरूकता एक अभियान है’’।

2.         ‘‘पुस्तकालय जागरूकता एक नवीन अवधारणा है जो समाज के व्यक्तियों को पुस्तकालय से जोड़ने का कार्य करता है’’।

3.         ‘‘पुस्कालय जागरूकता एक अभियान एवं कार्य करने की कला है’’।

4.         ‘‘पुस्तकालय जागरूकता आधुनिक समाज को पुस्तकालय से जोड़ने पर बल देता है’’।

5.         ‘‘पुस्तकालय जागरूकता समाज के लोगों को जागरूक करने की कार्यक्रम है’’

Library Bilaspurपुस्तकालय जागरूकता के उद्देश्य:-

पुस्तकालय जागरूकता के उद्देश्य निम्नलिखित है:-

1.         समाज में रहने वाले व्यक्तियों को पुस्तकालय से परिचित करना।

2.         पुस्तकालय का प्रमुख उद्देश्य समाज के लोगों को पुस्तकालय के प्रति जागरूकता पैदा करना।

3.         अपने पुस्तकालय का पाठक बनाना और उनके महत्वों को बताना।

4.         निरक्षर को साक्षर बनाना।

5.         अपाठकों को पुस्तकालयों का पाठक बनाना।

6.         पठन-पाठन की अभिरूचि जागृत करना।

7.         ग्रामीण स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना करना जागरूकता का एक अच्छा माध्यम है।

8.         प्रति व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से घर-घर जाकर उनसे मुलाकात कर मार्गदर्शन प्रदान करना।

9.         एक जागरूकता अभियान चलाकर नुक्कड़ सभाएंॅ नाट्य मंचन, सेमीनार, कार्यशाला और आमसभा आदि आयोजित कर पुस्तकालय के प्रति जागरूकता करना।

10.       पुस्तकालय के कार्य व सेवाओं में वृद्धि करना, आदि।

Library Bilaspurपुस्तकालय जागरूकता की आवश्यकताएं:-

            आज के मौजूदा समय में समाज पुस्तकालय से न पिछड़े को ध्यान में रखते हुए पुस्तकालय की सेवाओं,  कार्यों और प्रचार-प्रसार के लिए पुस्तकालय जागरूकता की आवश्यकताएं महसूस की गयी है, जो निम्नलिखित इस प्रकार है:-

1.         समाज को आगे बढ़ाने में पुस्तकालय जागरूकता की अहम् भूमिका है।

2.         आधुनिक समाज को शिक्षित व संगठित करने के लिए।

3.         पुस्तकालयों का समुचित उपयोग एवं विकास के लिए।

4.         डोर-टू-डोर पुस्तकालय जागरूकता अभियान चलाने के लिए।

5.         लोगों में अध्ययन पद्धति उत्पन्न करने के लिए।

6.         आत्म-निर्भर बनने के लिए प्रेरित करना।

7.         समय का सदुपयोग के लिए।

8.         पुस्तकालय विज्ञान के पांॅच सूत्रों का सही उपयोग करने के लिए।

9.         ज्ञान, सूचना का और विस्तार के लिए।

10.       पुस्ताकलय जागरूकता विशेष अभियान चलाकर समाज के सभी वर्गों के व्यक्त्यिों को पुस्तकालय के प्रति रूचि पैदा करने के लिए।

पुस्तकालय जागरूकता के प्रकार:-

            मुख्यतः पुस्ताकलय जागरूकता के दो प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार है:-

1.         बाह्य पुस्तकालय जागरूकता:- पुस्ताकालयों के बाहर जो रेडियो, टेलीविजन, पाम्पलेट, समाचार पत्र-पत्रिकाओं, फेसबुक, व्हॉटसएप आदि के माध्यमों से प्रचार-प्रसार पुस्तकालय का करना ही बाह्य पुस्तकालय जागरूकता कहलाते हैं।

2.         आंतरिक पुस्तकालय जागरूकता:- आंतरिक अर्थात् पुस्तकालयों के अन्दर ही पाठकों को परामर्श देकर आकर्षिक करना, पुस्तकालय के द्वारा भी पुस्तकालय के अपाठकों को परामर्श देकर उन्हें पुस्तकालय के कार्यों, सेवाओं का बोध कराना और अपने पुस्तकालय का पाठक बनाना आंतरिक पुस्तकालय जागरूकता कहलता है।

पुस्तकालय जागरूकता में पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका:-

            किसी भी पुस्तकालय में चाहे व सार्वजनिक पुस्तकालय हो या फिर चाहे वह शैक्षणिक या विशिष्ट पुस्तकालय हो, पुस्तकालय जागरूकता कार्यक्रम में अहम् भूमिका पुस्तकालयाध्यक्षों की होती है, क्योंकि जितने अच्छे से पुस्तकालयाध्यक्ष पाठकों को जागरूक करने के लिए मार्गदर्शन व आकर्षित करने के लिए तरीके व पुस्तकालयों की सेवाओं या अन्य विषयों के बारे में पाठकों को जानकारी दे सकते हैं या जागरूक कर सकते हैं, उतने अच्छे से एक कर्मचारी, आम आदमी नहीं दे सकते हैं, अर्थात् पुस्तकालयाध्यक्ष एक जानकार व्यक्ति होते हैं जो पुस्तकालय के सभी क्षेत्रों के बारे में अच्छा ज्ञान रखते हैं, जिससे समझाने के तरीके व भाषा भी आसान शब्दों में होते हैं, इन्हीं कारणों से पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका पुस्तकालय जागरूकता कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

पुस्तकालय जागरूकता अभियान:-

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्रों में समाज एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, क्योंकि पुस्तकालय समाज से आपस में जुड़े होते हैं, जैसे एक गाड़ी के दो पहिये के बराबर मापा जाता है। अर्थात् पुस्तकालय और समाज आपस में घनिष्ठ संबंध रखते हैं। बिना समाज के पुस्तकालय का निर्माण नहीं कर सकते और बिना पुस्तकालय के समाज का निर्माण नहीं कर सकते। इसी परिपेक्ष में समाज की पुस्तकालय के प्रति जागरूक होना अति आवश्यक है। इस समस्या का निवारण पुस्तकालय जागरूकता अभियान का शुरूआत करके समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसे ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम किया जा सकता है।

 पुस्तकालय जागरूकता के माध्यम:-

            पुस्तकालय जागरूकता के विभिन्न माध्यम उपलब्ध है जो वर्तमान समय की देन है, जिसे हम इन माध्यमों का उपयोग करके अपने समाज को एक नई शिखर तक ले जा सकते है और इससे एक शिक्षित समाज के साथ ही साथ एक शिक्षित देश भी बनाया जा सकता है, इनके कुछ माध्यम निम्नानुसार हैं:-

1.         रेडियो:- रेडियो पुस्तकालय जागरूकता का एक सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से हम खुद या स्वयं जाकर पुस्तकालय परिचर्चा रेडियो के द्वारा प्रसारण करके व्यक्तियों को पुस्तकालय के प्रति जागरूक कर सकते हैं।

2.         टी.वी.:- विभिन्न प्रकार के चैनलों के माध्यम से विडियो, आडियो पुस्तकालय के बारे में दिखाकर खुद जानकारी प्रदान कर समाज में जागरूकता फैलाने के लिए टी.वी. एक अच्छा माध्यम है।

3.         समाचार पत्र:- समय-समय पर पुस्तकालय के बारे में समाचार पत्रों जैसे-नई दुनिया, हरिभूमि,  दैनिक भास्कर,  टाइम्स ऑफ इंडिया, द-हिन्दू आदि में लेख प्रकाशित करके व सूचनाओं का प्रसारण में समाचार-पत्र उपयोगी साबित होता है।

4.         फेसबुक्स:- आज का वर्तमान समय सोशल-मीडिया का युग है, जिसमें पुस्तकालय जागरूकता एक सोशल मीडिया में फेसबुक्स प्रचार का अच्छा माध्यम माना जाता है।

5.         व्हाट्सएप:- इस सोशल मीडिया के युग में विभिन्न प्रकार के प्रचार-प्रसार करने के माध्यम माजूद हैं, जिसमें से व्हाट्सएप भी पुस्तकालय जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह अदा करते हैं।

6.         व्यक्तिगत जागरूकता:- व्यक्तिगत जागरूकता का अभिप्राय होता है कि हम स्वयं प्रति व्यक्ति डोर-टू-डोर जाकर समाज के लोगों को व्यक्तिगत रूप से प्रोत्साहित कर उन्हें पुस्तकालय का पाठक बनाना ही उद्देश्य रखना चाहिए, जिससे पुस्तकालय का उपयोगिता का विस्तार हो सके।

7.         इन्स्टाग्राम:- सोशल मीडिया में इन्स्टाग्राम भी पुस्तकालय जागरूकता फैलाने में एक-दूसरे को प्रदान करने का एक अच्छा माध्यम है, जो भी व्यक्ति अपने ग्रुप में जुड़े होते हैं, उन्हें नवीन सूचना प्रदान कर सकते हैं।

8.         छवि-गृह प्रचार:- पुस्तकालय जागरूकता संबंधी ज्ञान को किसी भी माध्यम से प्रत्येक घर में विशेषकर जो स्त्रियांॅ घर से बाहर जाने में सक्षम नहीं होती हैं, उन लोगों को घर में ही जाकर पुस्तकालय जागरूकता के बारे में जानकारी देना या पुस्तकालय के बारे में सभी पहलुओं को बारीकी से समझाना और पुस्तकालय का पाठक बनाना ही छवि-गृह प्रचार कहलाते हैं।

9.         आमसभा:- किसी भी गांॅव या शहर में एक स्थान पर गॉव के सभी व्यक्तियों को इकट्ठा करके आम सभा लगाकर पुस्तकालय का परिचय, महत्व, उपयोग, लाभ एवं आवश्यकता के बारे में सूचना प्रदान करके जागरूक करना आमसभा एक अच्छा माध्यम है।

10.       यूट्यूब:- सोशल मीडिया प्रचार में यूट्यूब भी एक पुस्तकालय जागकरूकता कार्यक्रम में विशेष रूप से सहायता करते हैं। यूट्यूब के माध्यम से हम एक विडिया लेक्चर तैयार कर यूट्यूब में अपलोड कर देते हैं, जिससे लाखों लोग इसे देखकर जागरूक हो सकते हैं, जिससे पुस्तकालय जागरूकता सफल हो पाता है।

11.       सेमीनार, कार्यशाला और संगोष्ठी:- पुस्तकालय जागरूकता के लिए पुस्तकालय में ही सेमीनार, कार्यशाला और संगोष्ठी का आयोजन कर पुस्तकालय जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जा सकता है। इस प्रकार का आयोजन ग्रामीण से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक किया जा सकता है। कार्यक्रम का थीम ऐसा होना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोग आकर्षित होकर भाग ले सकें।

12.       बैनर, पोस्टर, ब्रोशर और पाम्पलेट:- पुस्तकालय जागरूकता का और विस्तार करने के लिए हम अपने पुस्तकालय के बारे में जैसे बैनर, पोस्टर, ब्रोशर और पाम्पलेट छपवाकर समाज में व्यक्तियों को पर्सनली आम व्यक्ति को प्रदान कर सकते हैं, जिसमें संपूर्ण जानकारी संक्षेप में प्राप्त कर सकते हैं और पुस्तकालय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

13.       पुस्तक मेला:- पुस्तकालयों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पुस्तक मेला आयोजन करना जागरूकता एक अच्छा माध्यम है। ग्रमाीण क्षेत्र हो गया शहरी हम किसी भी स्थान पर पुस्तक मेला का आयोजन कर लोगों को अपने पुस्तकालय के प्रति आकर्षित कर सकते हैं।

14.       नाट्य मंच:- लोगों को जागरूक करने के माध्यम से नाट्य मंचन मनोरंजन के द्वारा पुस्तकालय जागरूकता किया जा सकता है, ऐसा करने से लोगों का अधिक मात्रा में आकर्षित होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

पुस्तकालय जागरूकता केन्द्रों की सूची:-

            आज के वर्तमान समय में पुस्तकालय एवं जागरूकता केन्द्रों के रूप में विभिन्न प्रकार के संगठन, पुस्तकालय, समाज के व्यक्ति, युवा, सामाजिक संगठन, आम जनता आदि ये सभी मिलकर आपस में पुस्तकालय जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सभी राज्यों में काम किया जाना अति आवश्यक है। राज्य सरकार, केन्द्र सरकार जिस प्रकार से समय-समय पर समाज के हित के लिए जागरूकता अभियान चलाते है, जैसे एड्स जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता, कोविड-19 जागरूकता इसी तरह समाज को शिक्षित करने के लिए पुस्तकालय से जोड़ने के लिए आम व्यक्तियों को पुस्तकालय जागरूकता अभियान पर जोर देने की आवश्यकता है, ताकि एक संगठित शिक्षित व ज्ञान समाज का निर्माण कर अपने गॉव, जिला राज्य का नाम रोशन कर सके। पुस्तजकालय जागरूकता केन्द्र निम्नलिखित इस प्रकार है:-

1.         खुला बागेश्वरी ग्रामीण पुस्तकालय एवं जागरूकता केन्द्र बिहार।

2.         शहरी पुस्तकालय एवं जागरूकता केन्द्र दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (नई दिल्ली)

निष्कर्ष:-

            हमारे भारत देश में कुल राज्यों की सुख्या 29 है, जहांॅ पर हमारा छत्तीसगढ़ राज्य इनमें से 28वांॅ राज्य है, जिसकी स्थापना 1 नवम्बर सन् 2000 को किया गया है। यह मध्यप्रदेश को विभाजित करके बनाया गया है। पुस्तकालय जागरूकता एक संदेश के साथ ही साथ एक अभियान भी है, जो पूरे भारत देश में इस अभियान को भारत के सभी राज्यों, जिलों, ब्लाक, पंचायत, गॉव के सभी स्तरों पर कार्य किया जाना चाहिए। समाज के ही किसी न किसी व्यक्ति को आगे आने की जरूरत है।

            इस प्रकार से संक्षेप में कहा जा सकता है कि पुस्तकालय जागरूकता आज के वर्तमान समय में समाज को आगे व शिक्षित समाज व देश का निर्माण एवं उन्नति में सहायक सिद्ध होगा। जिसे हमें कंधे से कंधा मिलाकर सभी को इस पर काम करने की जरूरत महसूस किया गया है। इसके प्रचार-प्रसार के माध्यमों पर भी जोर दिया गया ताकि आने वाले समय में यह एक सार्थक साबित हो सके।

धनकुमार महिलांग

लाइब्रेरियन, Library Bilaspur

सेन्ट्रल (डिजिटल) लाइब्रेरी नूतन चौक सरकण्डा बिलासपुर (छ.ग.)

पिन 495006 मो.नं. 8358994133, ई मेल- [email protected]

      यह लेख पुस्तकालय जागरूकता का परिचय देते हुए उनके अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, आवश्यकताओं का उल्लेख यहां किया गया है। पुस्तकालय जागरूकता के अभियान, उसके प्रकारों और पुस्तकालय जागरूकता में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख माध्यमों आदि का वर्णन किया गया है।