नॉर्मल डिलीवरी से जुड़े सवाल आपके जवाब हमारे

Last Updated on 6 months by Editorial Staff

नॉर्मल डिलीवरी से जुड़े सवाल आपके जवाब हमारे, जानिए Normal Delivery से जुड़े हुए अधिकतर सवालों के जवाब

गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर डिलीवरी तक महिला अपने शरीर में आने वाले बहुत से Changes और प्रेगनेंसी के दौरान अलग अलग अनुभव का अहसास करती है।

साथ ही जो बच्चा अभी गर्भ में ही होता है महिला का उससे बहुत ही गहरा Relation भी जुड़ जाता है और महिला मातृत्व के अहसास का अनुभव भी करने लगती है।

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पेट में बच्चा आने के साथ ही महिला बच्चे के बेहतर विकास और बच्चे को हर तरह की परेशानी से सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।

इसके अलावा यदि प्रसव की बात की जाये तो अधिकतर महिलाएं यही चाहती हैं की वो सामान्य तरीके यानी की नॉर्मल डिलीवरी से बच्चे को जन्म दें।

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लेकिन डिलीवरी कैसे होगी यह महिला नहीं बता सकती है। परन्तु यदि महिला Pregnancy के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखती है

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तो महिला के नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है

नॉर्मल डिलीवरी
नॉर्मल डिलीवरी

सबसे पहले तो महिला को एक अच्छी Pregnancy की डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए।

ताकि Pregnancy की शुरुआत से ही आपका सही ट्रीटमेंट शुरू हो सकें और यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है, चेकअप करवाती है।

तो इससे Pregnancy और डिलीवरी दोनों को आसान बनाने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिला को समय से अपनी सभी जाँच करवा लेनी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको किसी भी तरह की समस्या न हो।

जितना Pregnancy के दौरान समस्या नहीं होगी उतना ही महिला को प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

जांच के अलावा महिला को डॉक्टर द्वारा दी गई सभी दवाइयों का भी समय पर सेवन करना चाहिए।

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क्‍या होती है नॉर्मल डिलीवरी?

इसमें योनि से शिशु को जन्‍म दिया जाता है। इस तरह की डिलीवरी में कोई सर्जरी नहीं होती है। अधिकतर महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी ही होनी चाहिए क्‍योंकि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।

नार्मल डिलीवरी के लिए क्या खाना चाहिए?

नौवे महीने में डाइट गर्भावस्‍था के नौवे महीने में बच्‍चे का अमूमन पूरा विकास हो चुका होता है और उसका वजन भी बढ़ चुका होता है।
अदरक और लहसुन, गुनगुना पानी, दूध के साथ घी

नार्मल डिलीवरी कितने वीक में होती है?

बच्चा जनने वाली मां के लिए उनकी सलाह है कि अमूमन बच्चा 37 हफ़्ते (259 दिन) से लेकर 42 हफ़्ते (294 दिन) के बीच में होता है. इस समय तक बच्चा पूरी तरह परिपक्व हो जाता है.

डिलीवरी जल्दी होने के लिए क्या करें?

अरंडी का तेल भी जल्‍दी प्रसव शुरू करने की शक्‍ति रखता है। कई सालों से महिलाएं लेबर पेन के लिए अरंडी के तेल का इस्‍तेमाल करती हैं। वैसे तो अरंडी के तेल का सेवन प्रेगनेंट महिलाओं के लिए सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में इससे उल्‍टी और दस्‍त हो सकते हैं।

बिना दर्द के नार्मल डिलीवरी कैसे होती है?

नार्मल डिलीवरी की असहनीय वेदना से निजात दिलाने के लिए कमर के निचले भाग में स्थित रीढ़ की हड्डियों के बीच निश्चेतना की सूई दी जाती है। इससे लेबर-पेन बिल्कुल नहीं होता परंतु प्रसव की प्रक्रिया अपनी सामान्य गति से चलती रहती है। इस प्रकार बिना किसी तरह के दर्द समय पूरा होने पर प्रसव हो जाता है।

डिलीवरी के लिए बच्चेदानी का मुंह कैसे खुलता है?

पेट में कॉन्‍ट्रैक्‍टशन उठने की वजह से बच्‍चेदानी का मुंह खुलने लगता है जिससे बच्‍चे को बाहर आने में मदद मिलती है। लेबर के दौरान सर्विक्‍स की दीवार पतली हो जाती है। यह इफेसमेंट तक पहुंचने में मदद करता है। लेबर के समय सर्विक्‍स के अंदर मौजूद एम्निओटिक फ्लूइड बढ़ जाता है।

बच्चेदानी का मुंह क्यों नहीं खुलता है?

कई बार दवाओं से बच्चेदानी का मुंह नहीं खुल पाता, ऎसे में सर्जरी करनी पड़ती है। ज्यादा खून बहने पर भी सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है। बच्चे की धड़कन कम होने या गले में गर्भनाल लिपटी होने, बच्चे का आड़ा या उल्टा होना, कमजोरी या खून का दौरा कम होने पर भी ऑपरेशन होता है।

डिलीवरी के कितने दिन पहले बच्चेदानी का मुंह खुलता है?

गर्भावस्‍था के नौवें महीने में कुछ खास चीजों को खाने से बच्‍चेदानी का मुंह खुलने लगता है और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्‍था का नौवां महीना बहुत नाजुक और महत्‍वपूर्ण होता है। इस समय बच्‍चे का सिर नीचे की ओर आना होता है। नॉर्मल डिलीवरी के लिए बच्‍चे का इस पोजीशन में आना बहुत जरूरी है।

प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में क्या होता है?

40वें सप्‍ताह के साथ आपकी गर्भावस्‍था के नौ महीने भी खत्‍म होने वाले हैं। आपको थोड़ा नर्वस फील हो सकता है और डिलीवरी की चिंता भी घेर सकती है। यह आपकी प्रेगनेंसी का 40वां हफ्ता है। आपकी गर्भावस्‍था अपनी मंजिल तक पहुंच गई है।

बच्चा पैदा करते समय कितना दर्द होता है?

डॉक्टर्स और साइंटिस्ट के अनुसार एक बच्चे को जन्म देते समय महिला को बीस हड्डियों के एक साथ टूटने जितना दर्द होता है। महिलाओं को 57 डेल (दर्द नापने की इकाई) होने वाले इस दर्द की तुलना में पुरुषों की सिर्फ 45 डेल तक दर्द सहने की क्षमता है।

ऑपरेशन से बच्चे कैसे होते हैं?

इसे वजाइनल बर्थ आफ्टर सिजेरियन कहते हैं। सिजेरियन डिलीवरी में पेट और गर्भाशय पर बड़ा कट लगाकर सर्जरी कर के बच्‍चा निकाला जाता है। सिजेरियन के बाद 10 में से 7 महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी सफल होती है। अपनी नॉर्मल डिलीवरी की संभावना के बारे में आपको अपने डॉक्‍टर से परामर्श करना चाहिए।

प्रसव के दौरान दर्द कितने हड्डियों के हड्डियां के बराबर है?

विशेषज्ञों के शोध पर यकीन करें तो मनुष्य का शरीर 45 डेल (दर्द की तीव्रता मापने की इकाई) दर्द बर्दाश्त कर सकता है। महिला को प्रसव के दौरान 57 डेल का पेन होता है, जो बीस हड्डियां एक साथ टूटने से होने वाले दर्द के बराबर है।

महिला को गर्भावस्था और प्रसव की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। क्योंकि जितना महिला को गर्भावस्था और प्रसव की जानकारी होती है।

उतना ही महिला को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।

नॉर्मल डिलीवरी
नॉर्मल डिलीवरी

साथ ही जितना महिला को नॉर्मल डिलीवरी की जानकारी होती है उतना ही महिला को प्रसव को आसान बनाने और नॉर्मल डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

सामान्य प्रसव
सामान्य प्रसव

यदि महिला चाहती है की वो सामान्य प्रसव से बच्चे को delivery दे तो इसके लिए जरुरी होता है की महिला अपने खान पान का ध्यान रखें। यानी की महिला जो भी Diet ले रही है उसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो।

क्योंकि बेहतर खान पान माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

और जितना महिला स्वस्थ रहती है उतना ही नॉर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं।

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